मैं एक बच्चे के बर्थडे (जन्मदिन) प्रोग्राम में गया हुआ था। बर्थडे कार्यक्रम
लगभग शाम के सात बजे शुरू हुआ। सर्वप्रथम केक कटा। इसके बाद जैसाकि आजकल के
जन्मोत्सव आयोजनों के देखने को मिलता है। विशेषतौर पर युवा अपनी खुशी या मजाक को
जाहिर करते हुए अपने दोस्तों के चेहरे पर केक लगाते हैं। इसे खुशी का एक स्वाभाविक
रूप से माना भी जा सकता है। खैर केक कटने के बाद, वहां पर भी मुंह पर केक चपोरने का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ
करीबी मित्र एवं रिश्तेदार आपस में केक लगा रहे थे, कुछ दूरी बनाकर भी खड़े थे। हाकिम सिंह नामक शख्स ने अपनी
करीबी (जुल्म सिंह) की पत्नी जोकि हाकिम सिंह की करीबी रिश्ते में भाभी लगती थी, उसके चेहरे पर केक लगा दिया। हाकिम सिंह ने
सर्वेश्वर सिंह की पत्नी के चेहरे पर भी केक लगाया था दोनों महिलाएं ही हाकिम सिंह
की भाभी लगती थीं। इसी तरह अन्य मित्र भी चेहरे पर केक की लिपा-पोती कर रहे थे। बर्थडे वाले बच्चे के पिता समशेर सिंह पर उनके मित्र
संतोष पाल सिंह ने तो पूरे चेहरे पर केक मल दिया था। केक की लिपा-पोती के बाद, खाना भी शुरू हो गया। बीच में पता चला
कि जुल्म सिंह और उनकी पत्नी व बच्चे प्रोग्राम से चले गये हैं। कुछ रिश्तेदार
जुल्म सिंह की खोज बीन में भी लग गये थे। दूसरी तरफ डीजे का शोर था जिसपर बच्चे व
युवा नाच रहे थे। उनमें कुछ लोग खाने और पीने में मस्त थे। उसी दौरान दो पुलिस
कांस्टेबल के साथ जुल्म सिंह प्रोग्राम में वापस आया।
बर्थडे के आयोजक समशेर सिंह जोकि जुल्म सिंह का चचेरा भाई ही था। केक लगाने
वाला हाकिम सिंह समशेर सिंह का सगा जीजा था। जब यह बात हाकिम सिंह को पता चली, तो उन्होंने सरेआम जुल्म सिंह से मांफी मांग ली और कहा-‘भाई साहब मैंने तो मजाक में ही भाभी को केक लगा दिया था। घर
की बात है, पुलिस
में कम्प्लेन न करें।’
हाकिम सिंह ने आगे कहा-‘भाई साहब मैं गरीब ही सही, कुछ तो रिश्ते हैं ही आपके मुझसे। हाकिम सिंह की पत्नी भी
रोते हुए जुल्म सिंह से मांफी मांगी। लेकिन जुल्म सिंह न तो चचेरी बहन का रोना समझ
पा रहा था न ही जीजा की माफी मांगना। वह तो बस अपनी बात पर अडा हुआ, हाकिम सिंह को सजा दिलवाने पर ही तुला था।
जुल्म सिंह की पत्नी ने भी पुलिस शिकायत न करने को कहा था, परन्तु जुल्म सिंह उसे भी धमकाते हुए कह दिया-‘तुझे मेरे साथ रहना है की नहीं।’ यह सुनकर वह डर गयी थी। सबसे पहले जुल्म सिंह ने अपनी पत्नी
से ही कॉल 100 पर
फोन करके पुलिस को बुलवाया था। आए पुलिस कांस्टेबल यह सब माजरा देख और समझकर बड़ी
हैरान व परेशान भी थे। एक पुलिस कांस्टेबल ने जुल्म सिंह को समझाते हुए कहा-‘देखो भाई इतनी बड़ी बात तो है नही।’ जुल्म सिंह ने तो पुलिस वाले से कह दिया-‘मैंने आपको बुलाया है, इसने मेरी पत्नी के साथ छेड़-छाड़ की है, मैं इसे नहीं जानता
और न ही मेरे ये रिश्तेदार हैं।
मैंने भी उन पुलिस कांस्टेबल से बात की। इसपर एक पुलिस वाले ने कहा-भाई औरत की
कम्प्लेन है अगर औरत इस कम्प्लेन को वापस लेती है तो कोई केस नहीं बनेगा। एक पुलिस
कांस्टेबल ने मुझसे यह भी कहा कि ऐसी घटना और ऐसा आदमी मैंने पहली बार देखा है, जिसे रिश्तों की समझ ही नहीं है। भाई गलती हो गयी बन्दा माफी
मांग रहा है। जुल्म सिंह को समझाने-बुझाने में लगभग रात के 11 बज गये थे। पुलिस व
रिश्तेदारों के समझाने पर भी जुल्म सिंह न माना। तब पुलिस हाकिम सिंह को अपने साथ
पुलिस थाने में ले गई।
मैं भी उन लोगों के साथ पुलिस थाने में गया। तब रात के 1 बज गये थे। एक पुलिस कांस्टेबल ने कहा-‘आप लोग जुल्म सिंह से एक बार और बात कर लीजिए। मान जाए तो
ठीक है।
इसके बाद मैं और कुछ अन्य लोग जुल्म सिंह के घर गये। लेकिन उसने दरवाजा ही न
खोला,
बहुत देर के बाद चौथी मंजिल से ही बोला-‘सुबह बात होगी।’
इसके बाद अन्य लोगों के साथ मैं भी पुलिस थाने में आ गया। और यह माजरा पुलिस
कांस्टेबल को बताया। तब पुलिस कांस्टेबल ने कहा-‘अब तो मामला दर्ज करना ही पड़ेगा। महिला का मामला है, अधिकारी लोग हमसे पूछेगें, भाई ग्राउण्ड में हम रहते हैं, हम जानते हैं इतनी बड़ी बात
नहीं है, लेकिन उस महिला ने पुलिस अधिकारी
से पूछा तो, हमें अधिकारी को जबाब देना होगा।
एक सब इंस्पेक्टर ने तो महिला सुरक्षा की नया कानूनी पुस्तक भी दिखाते हुए
कहा-‘भाई निर्भया केस के बाद महिला सुरक्षा सम्बन्धी कानून बड़े
सख्त हुए हैं।’ इसके
बाद थाने में हाकिम सिंह के खिलाफ महिला छेड़छाड़ की कुछ मामूली धाराओं के साथ
एफ.आई.आर. दर्ज हो गयी।
कांस्टेबल कीर्तन लाल कुछ धाराओं व फॉर्म की जानकारी के लिए एक सब इंस्पेक्टर
के पास गए । सब इंस्पेक्टर ने हाकिम सिंह से गाँव, उम्र पूछा मेडिकल व अन्य फार्म
भरकर कीर्तन लाल को बताया। और कहा ऐसे आगे के फार्म भरो। जब कीर्तन लाल फार्म भरने
लगे तो एक शब्द लिखकर रूक जाते और मात्रा आदि पूछने लग जाते।
यह सब देखकर सब इंस्पेक्टर भूरे सिंह
ने गुस्से में कांस्टेबल कीर्तन लाल से कहा-‘अरे तुझे कांस्टेबल किसने बना दिया।’ फिर टेबल पर रखे गिलास पर नज़र दौड़ाई और अपने दराज़ से दवा की
एक गोली निकाली कर खाई।
वहां मौजूद समशेर सिंह के करीबी अंक्ल ब्रिजभान प्रसाद सिंह ने इंस्पेक्टर
भूरे सिंह से कहा-‘देख लो
साहब जमानता यहां हो जाए तो ठीक रहेगा।
इसपर भूरे सिंह ने उनसे कहा-‘भाई साहब कीर्तन लाल ही कुछ करेगा।’ भूरे सिंह ने आगे कहा-‘भाई समझदार हैं, हम
ही बोलते रहेंगे, आप भी तो बोलो।
ब्रिजभान सिंह बोले-‘साहब
दो हजार से काम हो जायेगा।’
इंस्पेक्टर भूरे सिंह बोले -‘भाई साहब कीर्तन लाल से बात करिये। 4:30 बज गये हैं, थोड़ा आराम कर लेता हूं सुबह मुझे कोर्ट भी जाना है।
बहुत देर तक कीर्तन लाल नहीं आये। तब एक कांस्टेबल से ब्रिजभान सिंह ने बात
की। वह दस हजार लेकर जमानत देने पर राजी हुआ। ब्रिजभान सिंह बोले नहीं साहब पांच
हजार लीजिए और छोड़िए। घर पर सब लोग परेशान हैं, हमने तो खाना भी नहीं खाया.
कांस्टेबल कीर्तन लाल के पास ब्रिजभान सिंह गये और हाथ में पांच हजार देते हुए
बोले लीजिए साहब इतना ही है।
इसी दौरान वहां एक और कांस्टेबल आ गया । कीर्तन लाल उसको देखते हुए बोले, आप
लोग ऐसे ही ले जाओ। जब मैं फ़ोन करू तो हाज़िर होना है, कुछ देर के बाद आया हुआ कांस्टेबल
वहां से चला गया, तब कीर्तन लाल ने कहा-‘भाई एस.एच.ओ. काली चरण को भी हिस्सा देना होता है।’
ब्रिजभान सिंह ने अपना रक्षा मंत्रालय का आईकार्ड भी दिखाया। इस पर कीर्तन लाल
ने उन्हें मना किया। ऐसे न दिखाया करो, सरकारी नौकरी में हो, कीर्तन लाल ने ब्रिजभान
सिंह का आधार कार्ड लिया और बेल पेपर पर उनसे और हाकिम सिंह से हस्ताक्षर कराये।
मैंने देखा कि किस प्रकार लोग कानून का दुरुपयोग करते हैं। जरूरत है, ऐसे लोगों से बहुत दूरी बनाकर रहने की। मेरा अपना तर्क और
मानना यह भी है कि जिस व्यक्ति में क्षमा करने की शक्ति नहीं, फिलिंग नहीं है, जिसमें दया नहीं है, जिसमें मानवता नहीं है, जिसे रिश्तों की कद्र नहीं है। वह इनसान होते हुए भी इनसान
नहीं है। इसके साथ मेरा सुझाव यह भी है कि किसी भी व्यक्ति को केक लगाने से पहले
सावधान रहे, मर्यादा
में ही रहे। नहीं तो अंजाम बुरा भी हो सकता है।
इस घटना का एक दूसरा धनात्मक पक्ष यह भी है कि अगर गलती किसी से भी हुई है या
की है चाहे वह अपना कितना भी करीबी सगा क्यों न हो। उसे सजा दिलवानी ही चाहिए।
लेकिन वह गलती कैसी है, सजा इस पर विशेष निर्भर करता है। एक तरफ यह भी देखने को मिलता है कि बहुत-सी महिलाओं
के साथ पिता, चाचा, मामा आदि बलात् दुष्कर्म कर देते हैं, ऐसी घटनाएं घरों में होती हैं। जोकि लोग उसे घर की इज्जत के
नाम पर चाहर दीवारी के अन्दर ही रखे रहते हैं, जबकि यह सरासर गलत और अमानवीय है। गलती के खिलाफ आवाज़ को बुलन्द करना बेहद
जरूरी है।
(यह सत्य घटना पर आधारित है, नाम और स्थान व पात्र में थोड़ा बदलाव है)
~सैयद परवेज
6 मार्च, 2018 को

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